माहिम वेस्ट स्थित कैफ़े ब्लू में हाल ही में ‘महाभोज उपन्यास की प्रासंगिकता’ पुस्तक का प्रकाशन समारोह आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम छोटा
लेकिन बेहद खास और यादगार रहा। इस पुस्तक की लेखिका शिवांगी जायसवाल हैं, जबकि इसकी निर्देशिका डॉ. संदेशा भावसार हैं, जो श्रीमती मणिबेन एम.पी. शाह आर्ट्स एंड कॉमर्स महिला महाविद्यालय, माटूंगा में कार्यरत हैं। यह हिंदी साहित्य में शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखी जा रही है।
इस शोध कार्य को पूरा करने का अवसर हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत देशपांडे के मार्गदर्शन और उनके द्वारा बनाए गए रिसर्च प्लान के कारण संभव हो सका। वे भी श्रीमती मणिबेन एम.पी. शाह आर्ट्स एंड कॉमर्स महिला महाविद्यालय, माटूंगा में कार्यरत हैं, और उनके निर्देशन ने इस कार्य को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पुस्तक के प्रकाशन में डॉ. लक्ष्मी जायसवाल का विशेष योगदान रहा, जो पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ से विद्यावाचस्पति सारस्वत सम्मान से सम्मानित लेखिका हैं। उन्होंने आर्थिक सहयोग प्रदान किया। साथ ही, इस पुस्तक की भूमिका भी डॉ. लक्ष्मी जायसवाल द्वारा लिखी गई है, जिससे उनका साहित्यिक योगदान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। यह कार्यक्रम भी उनके द्वारा आयोजित किया गया।
पुस्तक के बारे में —“लोकतंत्र केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि विश्वास का आधार है। परंतु जब यही व्यवस्था स्वार्थ और सत्ता की राजनीति में उलझ जाती है, तब साहित्य ही सच बोलने का साहस करता है। “महाभोज उपन्यास की प्रासंगिकता” एक गंभीर और विचारोत्तेजक अध्ययन है, जिसमें लेखिका शिवांगी जायसवाल ने सामाजिक यथार्थ, राजनीतिक संरचना और जनसंघर्ष के आयामों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया है। उनकी लेखनी में संवेदनशीलता, प्रतिबद्धता और वैचारिक स्पष्टता का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।”
कार्यक्रम का सबसे खास पल वह रहा, जब सभी ने हाथों में पुस्तक की प्रतियां लेकर सामूहिक रूप से फोटो खिंचवाई। इस दौरान माहौल उत्साह, खुशी और गर्व से भरा हुआ नजर आया।
इस अवसर पर लेखिका के सहपाठी इरम मलिक और खुशबु गोंड भी मौजूद रहे। यह कार्यक्रम सभी के लिए एक यादगार क्षण बन गया।
