वो जो मेरा शहर था कभी, वहाँ के रंग कैसे हैं?
सतरंगी सपनों से सजे, रंगीनियाँ समेटे हों वैसे!
वो जो शहर था मेरा कभी, वहाँ की गलियाँ कैसी हैं?
संकरे रास्तों में संजोए, सैंकड़ों अरमान बसे हों वैसे!
वो जो शहर था मेरा कभी, वहाँ की नदियाँ कैसी हैं?
अपनी अविरल कलकल में, उस कोलाहल को समायी हों वैसे!
वो जो शहर था मेरा कभी, वहाँ के लोग कैसे हैं?
अपनी धड़कनों के एहसासों में, समय को समेट रखें हों वैसे!
वो जो शहर था मेरा कभी, वहाँ की हरियाली कैसी है?
जीवन की राह दिखाती, श्वास-चक्र की हरीतिमा हो वैसे!
वो जो शहर था मेरा कभी, वहाँ की बरसातें कैसी हैं?
रिमझिम गिरती बूँदों में, खुशियों का जलतरंग हो वैसे!
वो जो शहर था मेरा कभी, वहाँ की सुबह सुहानी कैसी है?
धरती सूरज से मिल रही, क्या वही खुमार लिए हो वैसे!
वो जो शहर में मेरा घर था कभी, वहाँ की दीवारें कैसी हैं?
अपने चट्टानी हौसलों में, मजबूत इरादे पिरोए हों वैसे!
वो जो शहर में मेरा घर था कभी, वहाँ का आँगन कैसा है?
इंतजार में ओझल पलकें, पल-पल व्यग्र हो रहीं हो वैसे!
ये जो शहर है मेरा अभी, यहाँ के रंग अलग कुछ गढ़ती हूँ,
यहाँ की शाम, यहाँ की सुबह, सड़कें, गलियाँ सब पढ़ती हूँ!
इस शहर से उस शहर तक, कड़ी कोई चुन लेती हूँ,
फ़र्ज़ और क़र्ज़ के बंधन में, डोर कभी बुन लेती हूँ,
जो छोड़ आए उस मिट्टी को, उसकी आहट यहाँ सुन लेती हूँ,
कर्म के इस काल से, कुछ पल जन्म को देती हूँ,
साँसों का शोर लिए हूँ जबतक, खामोशी के गीत भी गुनगुनाती हूँ,
ज़िंदा होने के इस भ्रम में, ज़िंदगी को कुछ वापस ही कर चलती हूँ।
लेखिका परिचय –
एचआर प्रोफेशनल रह चुकी ज्योति झा, लेखिका, कॉलमनिस्ट (द लिटरेरी मिरर), और सीनियर एडिटर (टुडे मैगज़ीन) हैं। ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया राइट इंडिया’ विजेता ज्योति ने अंग्रेजी और हिंदी में दस से अधिक पुस्तकों का लेखन, संपादन और अनुवाद किया है। TEDx वक्ता, IIT और IIM में वक्ता, ‘विद्या वाचस्पति’, ‘डॉ शांति जैन स्मृति सम्मान’, ‘एशियन लिटरेरी अवार्ड’, ‘ग्लोबल प्रोग्रेसिव वूमेन अवार्ड’ से सम्मानित ज्योति, महिला सशक्तिकरण पर अपनी पुस्तक ‘आनंदी’ के लिए चर्चित हैं। उन्होंने IIT और NIT में लेखन कार्यशालाएँ (राइटिंग वर्कशॉप) ली हैं, साथ ही IITBHU (काशीयात्रा) में जज, फेमिना और इंडिया टुडे में फीचर हुई हैं। रेडियोसिटी पुणे 91.1 FM में उनका साक्षात्कार प्रसारित हुआ है। उनकी पुस्तकों को पाठकों, प्रमुख मीडिया घरानों और साहित्यिक समुदाय से बहुत सराहना मिली है। उनकी रचनाएँ अंतर्राष्ट्रीय संकलनों, प्रमुख मीडिया घरानों, प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं और जर्नलों में प्रकाशित हुई हैं। उनकी कविता को कर्नाटक साहित्य परिषद (मिंचुल्ली साहित्य पत्रिके) द्वारा सराहा गया है। उनकी आने वाली पुस्तक ऑटिज़्म पर है। वे लिटरेरी चैप्टर, लेट्स इंस्पायर बिहार की मुख्य समन्वयक हैं।

बहुत ही सुंदर संयोजन के साथ एक खुबसूरत रचना ❤️
बहुत -बहुत बधाई आदरणीय ज्योति झा जी को 👏👏🎉🎉